काशीपुर में किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण की जांच के लिए आईजी एसटीएफ की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन किया गया है। इसके साथ ही गहन विवेचना के निर्देश दिए गए हैं।
जनपद ऊधमसिंहनगर के ग्राम पैगा, थाना आईटीआई क्षेत्र निवासी सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले की जांच एसआईटी के हवाले कर दी गई है। इसके अलावा 12 पुलिसकर्मियों को गढ़वाल रेंज स्थानांतरित कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे करेंगे। पांच सदस्यीय SIT में पुलिस अधीक्षक चंपावत अजय गणपति, क्षेत्राधिकारी टनकपुर वन्दना वर्मा, निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट (चंपावत) तथा उपनिरीक्षक मनीष खत्री (चंपावत) को शामिल किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि SIT प्रकरण से संबंधित सभी अभियोगों, तथ्यों एवं आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा दोष पाए जाने पर नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह है मामला
उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर क्षेत्र में सुखवंत सिंह (40) निवासी ग्राम पैगा काशीपुर ने गोलियाबार क्षेत्र स्थित एक होटल में खुद को अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मार ली थी। जांच में सामने आया कि सुखवंत सिंह जमीन के एक पुराने विवाद से मानसिक रूप से परेशान था। मृतक के परिजनों के अनुसार सुखवंत सिंह ने करीब 3.80 करोड़ रुपये में 50 बीघा जमीन खरीदी थी जिसकी रजिस्ट्री को लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद किसान के परिजनों ने काशीपुर के एसएसपी, कुंडा थाना प्रभारी और पैगा चौकी प्रभारी पर मामले में अनदेखी और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। सुखवंत ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कुंडा थाना के एसओ, पैंगा के चौकी प्रभारी और ऊधमसिंह नगर के एसएसपी पर प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। सुखवंत सिंह के पिता तेजा सिंह सिंह ने बताया कि एक साल पहले पेपर मिल के लिए सात एकड़ जमीन अधिग्रहीत हुई थी। मुआवजे के पैसे को सुखवंत दूसरी जगह इन्वेस्ट करना चाह रहा था। प्रापर्टी डीलरों ने उसे कुंडा के बक्सौरा में सात एकड़ जमीन दिखाई। इसका बाजार मूल्य चार करोड़ रुपये था। नकद व चेक के माध्यम से सुखवंत ने 3.80 करोड़ दे दिए। 15 अप्रैल 2025 को काशीपुर में कुछ अन्य लोगों की मौजूदगी में जिस जमीन की रजिस्ट्री की गई, वह दूसरी थी। उसका बाजार मूल्य तकरीबन 50 लाख रुपये था। इसकी जानकारी होने के बाद सुखवंत सिंह ने आरोपियों से रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने पुलिस के साथ मिलकर उनका और पूरे परिवार का उत्पीड़न किया। सुखवंत सिंह के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसमें थाना से लेकर जिला स्तर के पुलिस अधिकारी शामिल थे। देहरादून भी जाकर पुलिस अफसरों से मिला लेकिन कुछ नहीं हुआ।

